वैसे, वैज्ञानिकों का मानना है कि येति या हिममानव महज़ एक ख़याल है. हिमालय के येति की ही तरह पश्चिमी देशों में बिगफ़ूट या सैस्क्वैच जैसे
विशालकाय बंदर-मानव के क़िस्से मशहूर हैं.
येति हिमालय की लोककथाओं की उपज है. ये पहाड़ी क़िस्सों का बहुत पुराना किरदार है. ख़ास तौर से नेपाल के पहाड़ी इलाक़ों में रहने वाले शेरपा के जीवन का तो ये अटूट हिस्सा है.
नेपाल के शिवा ढकाल ने येति के बारे में 12 लोककथाओं को अपनी किताब, 'फोक टेल्स ऑफ़ शेरपा ऐंड येति' में इकट्ठा किया है. इन सभी कहानियों में येति को ख़तरा बताया गया है.
मसलन, 'येति का विनाश' नाम के क़िस्से में एक शेरपा, क़हर बरपाने वाले येति के झुंड से बदला लेता है. इस क़िस्से में शेरपा शराब पीकर आपस में झगड़ते हैं. ऐसा कर के वो येति के झुंड को भी अपनी नक़ल करने के लिए उकसाते हैं. कहानी के मुताबिक़, इंसानों की नक़ल कर के येति भी शराब पीकर आपस में लड़ने लगते हैं. लेकिन, जल्द ही उन्हें ये साज़िश समझ में आ जाती है तो येति लड़ना बंद कर के हिमालय की ऊंची चोटियों में जाकर छिप जाते हैं, ताकि एक दिन इंसानों से बदला ले सकें.
शेरपाओं में लोकप्रिय एक और कहानी में येति या हिममानव एक लड़की से बलात्कार करता है. जिसके बाद उस लड़की की सेहत बिगड़ जाती है. एक और लोककथा में येति को सूरज चढ़ने के साथ ही और विशाल व बलवान होता बताया गया है. जबकि, उसे देखने वाले इंसान अपनी ताक़त खो बैठते हैं और बेहोश हो जाते हैं.
इन पहाड़ी क़िस्सों से स्थानीय लोग नैतिकता का सबक़ पढ़ते हैं. जंगली जानवरों से आने वाले ख़तरे के लिए तैयार होते हैं.
शिवा ढकाल कहते हैं कि, 'येति के क़िस्से लोगों को चेताने के लिए गढ़े गए. उन्हें नैतिकता के रास्ते पर चलाने के ज़रिए के तौर पर इस्तेमाल किए गए. ताकि बच्चे अपने परिजनों से ज़्यादा दूर अनजान जगहों की तरफ़ न जाएं और सुरक्षित रहें.'
शिवा ढकाल कहते हैं कि, 'कुछ लोगों का मानना है कि येति महज़ डराने के लिए गढ़ा गया किरदार है, जो पहाड़ों पर रहने वाले लोगों को हर मुश्किल का निडर होकर सामना करने के लिए तैयार करता है.'
लेकिन, जब पश्चिमी देशों के लोग हिमालय की सैर को जाने लगे, तो ये लोककथाओं का किरदार येति और भी बड़ा होता गया. और सनसनीख़ेज़ हो गया.
ब्रिटेन के राजनेता और अन्वेषक चार्ल्स होवार्ड-बरी कुछ लोगों को लेकर माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई के लिए गए. रास्ते में उन्हें कुछ विशाल पैरों के निशान दिखे. उन्हें बताया गया कि ये मेतोह-कांगमी यानी इंसान और भालू जैसे किसी जीव के पांवों के निशान हैं.
जब ये दल लौटा, तो एक पत्रकार ने उनसे बातचीत की. उसका नाम हेनरी न्यूमैन था. उसने मेतोह शब्द का अनुवाद गंदा और फिर घटिया के तौर पर किया.
इसी ग़लत रिपोर्टिंग से पश्चिमी देशों में येति या हिममानव का किरदार बेहद लोकप्रिय हो गया.
1950 का दशक आते-आते बहुत से पश्चिमी सैलानी हिमालय में येति को देखने के लिए आने लगे थे. हॉलीवुड स्टार जेम्स स्टीवर्ट ने तो येति की एक उंगली पाने का भी दावा कर दिया. हालांकि 2011 में डीएनए टेस्ट में वो उंगली इंसानी निकली.
उसके बाद से हम कई बार येति के पैरों के निशान, अजीब सी तस्वीरें और यहां तक कि येति देखने वालों के चश्मदीदों के दावों से भी दो-चार हो चुके हैं. कुछ लोगों ने तो येति की खोपड़ी तक पाने का दावा किया है. किसी को येति के बाल मिले, तो किसी को हड्डियों के टुकड़े. लेकिन, जांच में ये सभी किसी और जीव के अंग पाए गए. कभी भालू, तो कभी हिरण या बंदर के.
किसी ठोस सबूत के बग़ैर भी येति या हिममानव का क़िस्सा बार-बार सुनाया जाता रहा है. येति आज ऐसा किरदार बन गया है, जिसके धरती पर होने की संभावना न के बराबर है, पर लोगों का यक़ीन है कि बढ़ता ही जा रहा है.
अब भारतीय सेना ने कुछ तस्वीरों के हवाले से येति के पांव के निशान होने का दावा किया है.
पर, ब्रिटिश पर्वतारोही रीनहोल्ड मेसनर को येति देखने का सबसे बड़ा दावेदार कहा जाता है. मेसनर ने कई बार येति देखने का दावा किया है. मेसनर का कहना है कि उन्होंने पहली बार 1980 के दशक में हिमालय की गोद में येति को देखा था. उसके बाद से वो दर्जनों बार हिमालय की बर्फ़ीली चोटियों को तलाशने की कोशिश कर सकते हैं.
मेसनर का कहना है कि येति और कोई जानवर नहीं, असल में एक भालू है.
उनके मुताबिक़ असली भालू और शेरपाओं के क़िस्सों के काल्पनिक किरदार मिलकर ही येति की किंवदंति तैयार हुई है.
मेसनर का कहना है कि, 'येति के पैरों के जो भी निशान दिखे हैं, असल में वो भालू के पैर के निशान हैं. येति एक हक़ीक़त है. वो कोई कल्पना नहीं है.'
येति हिमालय की लोककथाओं की उपज है. ये पहाड़ी क़िस्सों का बहुत पुराना किरदार है. ख़ास तौर से नेपाल के पहाड़ी इलाक़ों में रहने वाले शेरपा के जीवन का तो ये अटूट हिस्सा है.
नेपाल के शिवा ढकाल ने येति के बारे में 12 लोककथाओं को अपनी किताब, 'फोक टेल्स ऑफ़ शेरपा ऐंड येति' में इकट्ठा किया है. इन सभी कहानियों में येति को ख़तरा बताया गया है.
मसलन, 'येति का विनाश' नाम के क़िस्से में एक शेरपा, क़हर बरपाने वाले येति के झुंड से बदला लेता है. इस क़िस्से में शेरपा शराब पीकर आपस में झगड़ते हैं. ऐसा कर के वो येति के झुंड को भी अपनी नक़ल करने के लिए उकसाते हैं. कहानी के मुताबिक़, इंसानों की नक़ल कर के येति भी शराब पीकर आपस में लड़ने लगते हैं. लेकिन, जल्द ही उन्हें ये साज़िश समझ में आ जाती है तो येति लड़ना बंद कर के हिमालय की ऊंची चोटियों में जाकर छिप जाते हैं, ताकि एक दिन इंसानों से बदला ले सकें.
शेरपाओं में लोकप्रिय एक और कहानी में येति या हिममानव एक लड़की से बलात्कार करता है. जिसके बाद उस लड़की की सेहत बिगड़ जाती है. एक और लोककथा में येति को सूरज चढ़ने के साथ ही और विशाल व बलवान होता बताया गया है. जबकि, उसे देखने वाले इंसान अपनी ताक़त खो बैठते हैं और बेहोश हो जाते हैं.
इन पहाड़ी क़िस्सों से स्थानीय लोग नैतिकता का सबक़ पढ़ते हैं. जंगली जानवरों से आने वाले ख़तरे के लिए तैयार होते हैं.
शिवा ढकाल कहते हैं कि, 'येति के क़िस्से लोगों को चेताने के लिए गढ़े गए. उन्हें नैतिकता के रास्ते पर चलाने के ज़रिए के तौर पर इस्तेमाल किए गए. ताकि बच्चे अपने परिजनों से ज़्यादा दूर अनजान जगहों की तरफ़ न जाएं और सुरक्षित रहें.'
शिवा ढकाल कहते हैं कि, 'कुछ लोगों का मानना है कि येति महज़ डराने के लिए गढ़ा गया किरदार है, जो पहाड़ों पर रहने वाले लोगों को हर मुश्किल का निडर होकर सामना करने के लिए तैयार करता है.'
लेकिन, जब पश्चिमी देशों के लोग हिमालय की सैर को जाने लगे, तो ये लोककथाओं का किरदार येति और भी बड़ा होता गया. और सनसनीख़ेज़ हो गया.
ब्रिटेन के राजनेता और अन्वेषक चार्ल्स होवार्ड-बरी कुछ लोगों को लेकर माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई के लिए गए. रास्ते में उन्हें कुछ विशाल पैरों के निशान दिखे. उन्हें बताया गया कि ये मेतोह-कांगमी यानी इंसान और भालू जैसे किसी जीव के पांवों के निशान हैं.
जब ये दल लौटा, तो एक पत्रकार ने उनसे बातचीत की. उसका नाम हेनरी न्यूमैन था. उसने मेतोह शब्द का अनुवाद गंदा और फिर घटिया के तौर पर किया.
इसी ग़लत रिपोर्टिंग से पश्चिमी देशों में येति या हिममानव का किरदार बेहद लोकप्रिय हो गया.
1950 का दशक आते-आते बहुत से पश्चिमी सैलानी हिमालय में येति को देखने के लिए आने लगे थे. हॉलीवुड स्टार जेम्स स्टीवर्ट ने तो येति की एक उंगली पाने का भी दावा कर दिया. हालांकि 2011 में डीएनए टेस्ट में वो उंगली इंसानी निकली.
उसके बाद से हम कई बार येति के पैरों के निशान, अजीब सी तस्वीरें और यहां तक कि येति देखने वालों के चश्मदीदों के दावों से भी दो-चार हो चुके हैं. कुछ लोगों ने तो येति की खोपड़ी तक पाने का दावा किया है. किसी को येति के बाल मिले, तो किसी को हड्डियों के टुकड़े. लेकिन, जांच में ये सभी किसी और जीव के अंग पाए गए. कभी भालू, तो कभी हिरण या बंदर के.
किसी ठोस सबूत के बग़ैर भी येति या हिममानव का क़िस्सा बार-बार सुनाया जाता रहा है. येति आज ऐसा किरदार बन गया है, जिसके धरती पर होने की संभावना न के बराबर है, पर लोगों का यक़ीन है कि बढ़ता ही जा रहा है.
अब भारतीय सेना ने कुछ तस्वीरों के हवाले से येति के पांव के निशान होने का दावा किया है.
पर, ब्रिटिश पर्वतारोही रीनहोल्ड मेसनर को येति देखने का सबसे बड़ा दावेदार कहा जाता है. मेसनर ने कई बार येति देखने का दावा किया है. मेसनर का कहना है कि उन्होंने पहली बार 1980 के दशक में हिमालय की गोद में येति को देखा था. उसके बाद से वो दर्जनों बार हिमालय की बर्फ़ीली चोटियों को तलाशने की कोशिश कर सकते हैं.
मेसनर का कहना है कि येति और कोई जानवर नहीं, असल में एक भालू है.
उनके मुताबिक़ असली भालू और शेरपाओं के क़िस्सों के काल्पनिक किरदार मिलकर ही येति की किंवदंति तैयार हुई है.
मेसनर का कहना है कि, 'येति के पैरों के जो भी निशान दिखे हैं, असल में वो भालू के पैर के निशान हैं. येति एक हक़ीक़त है. वो कोई कल्पना नहीं है.'